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चंद्रबाबू नायडू की एनडीए से जुड़ने की ख़बरों पर प्रतिक्रिया, आंध्र प्रदेश मेरी प्राथमिकता – चन्द्रबाबू नायडू

एनडीए से जुड़े नेता चंद्रबाबू नायडू की तेलगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा देने पर केंद्र के मना करने पर गठबंधन को छोड़ दिया था। अब दुबारा टीडीपी के एनडीए में मिलने की खबरे तेज़ चुकी है। आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारी जोर पकड़ती दिख रही है और इसी बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन की पुरानी सहयोगी टीडीपी के फिर से साथ मिलने की खबरे राजनीति में छाई हुई है।

एनडीए का हिस्सा बनने की ख़बरों के बीच टीडीपी के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के भूतपूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू ने उपर्युक्त समय में ही कुछ कहने की बात कही है।

विज़न-2047 डॉक्यूमेंट पर बोले चंद्रबाबू

एनडीए में शामिल होने की सम्भावना के सवाल पर चंद्रबाबू ने बताया – अभी इस बारे में बाते करना का सही समय नहीं आया है और सही समय पर मैं इसको लेकर चर्चा करूँगा। पोस्ट सिटी में हुए एक प्रोग्राम में विज़न-2047 डॉक्यूमेंट के लॉन्च होने पर चंद्रबाबू ने मीडिया बातचीत की। इससे पहले एनडीए के संस्थापक नेताओं में से एक चंद्रबाबू नायडू की पार्टी तेलगु देशम पार्टी ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य की मान्यता से मना होने के खिलाफ जाते हुए पार्टी को को छोड़ा था।

चंद्रबाबू की एनडीए में वापसी की चर्चा क्यों

इस समय आंध्र प्रदेश की राजनीति में हलचले हो रही है। यहाँ पर 2024 के लोकसभ चुनाव के साथ में विधानसभा के इलेक्शन होने वाले है। इस वजह से बहुत सी पोलिटिकल पार्टियाँ अपने दांव-पेंच आजमाने में लगी है। इसी शनिवार में देश के गृह मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने चंद्रबाबू से मिलकर नए समीकरण पैदा किये है।

अब खबरे आ रही है कि 5 वर्षों के बाद बीजेपी और टीडीपी एक बार फिर से साथ हो सकते है। क्या अमित शाह और चंद्रबाबू नायडू की ये मीटिंग कुछ ख़ास करने वाली है? पहले से ही 2024 के चुनावों में इन पार्टियों के एक साथ आने की खबरे तेज़ हुई। चंद्रबाबू के घर पर ही दोनों ने लगभग 1 घंटे की मीटिंग की, जिसमे बहुत से मामलों पर बातें हुई। यद्यपि दोनों ही दलों के नेता एक साथ 2024 के इलेक्शन साथ में लड़ने की बात पर कुछ नहीं बोल रहे है।

एनडीए से अलग होने की वजह

साल 2014 में लोकसभा के इलेक्शन के समय लगभग 10 सालों के बाद चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी की एनडीए में वापसी हुई थी। इस साल का आम चुनाव दोनों दलों ने साथ आकर ही लड़ा लेकिन 2018 तक इनके रास्ते अलग हुए। फरवरी 2018 में संसद के बजट सत्र में तेलगु देशम पार्टी ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य मिलने की माँग पर हंगामा कर दिया।

बजट में चंद्रबाबू की पार्टी की माँग को लेकर को चर्चा न होने की वजह से दोनों पार्टियों में दुनिया बढ़ी। मार्च महीने में दोनों दल अलग हो गए और चंद्रबाबू की पार्टी (टीडीपी) केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लेकर आई।

आंध्र प्रदेश मेरी प्राथमिकता – चद्रबाबू नायडू

नायडू के अनुसार अगले वर्ष की राजनीति में मेरी भूमिका एकदम साफ़ रहने वाले है। उनके अनुसार उनकी प्राथमिकता आंध्र प्रदेश है। वे राज्य के पुनर्निर्माण की तैयारी करेंगे। चंद्रबाबू ने अमरावती राजधानी के मामले में मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी पर निशाना साधा – ‘आप (मुख्यमंत्री) विधानसभा में बैठे है। आप सचिवालय में बैठे है। आप कैबिनेट मीटिंग कहाँ पर कर रहे है? क्या यह अस्थाई है? उनके अनुसार जगन मोहन रेड्डी क्या बकवास करते है। पिछले 10 सालो से वे काम कर रहे है। सभी कुछ तैयार हो गया।’

आंध्र प्रदेश में विधानसभा की स्थिति

आंध्रा की 175 विधानसभा सीटों में वाईएसआर कांग्रेस बहुमत में है, इस पार्टी के पास 147 विधायक है। उनके सामने प्रमुख विपक्षी दल यानी चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी के पास मात्र 19 विधायक ही है। राज्य में मुख्य राजनैतिक पार्टी बीजेपी और कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं है।

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