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Business Idea: सिर्फ 15 हजार रुपये में शुरू करें यह बिजनेस! 3 महीने में ही कमा लेंगे 3 लाख रुपये, जानें तरीका

आजकल बहुत सी कम्पनियाँ कॉन्ट्रैक्ट बेस पर Medicine Plant की खेती करवा रही है। खेती करने के लिए आपको कुछ हजार रुपए ही खर्चने होंगे और इसके बदलें में आप लाखों रुपए का मुनाफा पा सकते है।

आज कल बहुत से लोग बेरोजगारी या फिर कम कमाई की समस्या से दो चार होते दिख रहे है। इसी बात को ध्यान में रखते हुई कुछ लोगो के मन में कोई बिज़नेस करने का विचार भी आता है। इस प्रकार के लोगों के लिए ऐसा Business Idea है जिसमे वे कम लगात लगाकर अच्छीखासी कमाई कर सकते है। इस बिज़नेस में आपको सिर्फ एक बार 15 हजार रुपए निवेश करने होंगे और इसके बाद आप 3 लाख रुपए तक की इनकम कर सकते है। खास बात तो यह है कि इस बिज़नेस के लिए आपको केंद्र सरकार की ओर से सहायता भी दी जाएगी।

हम यहाँ पर बात कर रहे है तुलसी की खेती यानी Basil Cultivation की। इन दिनों मार्केट में मेडिसिनल पौधों की भारी डिमांड है। आप चाहे तो इस काम के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर खेत भी ले सकते है। तुलसी की खेती को मेडिसिनल प्लांट के अंतर्गत लिया जाता है। तुलसी की खेती के लिए आपको ना ही बड़े खेतों की जरुरत है और ना ही बहुत बड़े निवेश की। इस खेती के लिए आपको अपने खेत की भी कोई जरुरत नही है। आजकल बहुत सी कम्पनियाँ कॉन्ट्रैक्ट बेस पर Medicine Plant की खेती करवा रही है। खेती करने के लिए आपको कुछ हजार रुपए ही खर्चने होंगे और इसके बदलें में आप लाखों रुपए का मुनाफा पा सकते है।

तीन महीने में तीन लाख का मुनाफा

सामन्यतया तुलसी के पौधे को धार्मिक मामलो से जोड़कर देखने की विचारधारा है। लेकिन तुसली को अध्यात्म (Religious) के साथ चिकित्सीय गुण भी मिले हुए है। वैसे तो तुलसी के बहुत से प्रकार पाए जाते है, इनमे से यूजीनोल और मिथाइल सिनामेट भी होती है। इनकी सहायता से कैंसर जैसे जीवनघाती रोगों के इलाज़ की दवाइयाँ बनती है। एक हेक्टेयर खेत में तुलसी की खेती को करने के लिए लगभग 15 हजार रुपयों तक का खर्च आ जाता है। और मात्र 3 महीनों के बाद ही आपको इसके लिए 3 लाख रुपए तक मिल जायेंगे।

तुलसी की खेती को करने की जानकारी

तुलसी के खेती हे लिए बलुई दोमट की मिट्टी को सर्वाधिक उपर्युक्त माना जाता है। खेती के लिए सबसे पहले जून-जुलाई के महीने में बीजो की नर्सरी बनाई जाती है। नर्सरी को तैयारी करने के बाद इसकी रोपाई का काम होता है। रोपाई के समय पर लाइन से लाइन की दुरी को 60 सेमी. और पौधों की आपसी दुरी को 30 सेमी. रखा जाता है। खेती 100 दिनों के बाद तैयार हो जाती है, इसके बाद इसकी कटाई का काम शुरू होता है।

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कमाई के लिए इन कंपनियों से जुड़े

हमारे देश में पतंजलि, डाबर, वैधनाथ इत्यादि जैसी आयुर्वेदिक दवाईयां तैयार करने वाली कम्पनियाँ ‘कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग’ का कार्य करवा रही है। यह तैयार फसल को अपने द्वारा ही खरीद लेती है। इस समय बाजार में तुलसी के बीज और तेल का अच्छा व्यापार है। प्रतिदिन नयी कीमत पर तेल और तुसली के बीज बेचे जाते है।

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