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GNA का DNA Modi-fied हो चुका है’, गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे पर कांग्रेस की खरी खोटी

कांग्रेस पार्टी की अस्थिरता का सिलसिला जारी है। चुनावों में पार्टी का ख़राब प्रदर्शन और बड़े नेताओं का पार्टी छोड़ना उसे प्रतिदिन कमजोर कर रहा है। फिलहाल तो पक्ष और विपक्ष दोनों खेमों में इस्तीफा और इस पर प्रतिक्रिया जोरो पर है। कांग्रेस का कहना है – ‘जब राज्यसभा नहीं मिली तो छटपटाने लग गए और रिमोट नरेंद्र मोदी को दे दिया। GNA का डीएनए ‘मोदी-मय’ हो गया है।

लगभग चार दशकों से कांग्रेस की पहचान रहने वाले आज़ाद (Gulam Nabi Azaad) को बिलकुल भी अंदाज़ा न होगा कि उनको ऐसे-ऐसे शब्द कहे जा रहे है। कांग्रेस के बयानों से उनको बेरहम राजनीति का पता चल रहा होगा।

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कांग्रेस की प्रतिक्रियाएँ

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आजाद पर निशाना साधते हुए कहा – जीएनए ने ऐसे समय पर यह कदम लिया है जब पार्टी महँगाई, बेरोज़गारी एवं ध्रुवीकरण के विरुद्ध लड़ रही है। उनके इस्तीफे की बाते तथ्यपरक नहीं है, इसका समय भी सही नहीं है।

रमेश कहते है – ‘जिस व्यक्ति को कांग्रेस नेतृत्व ने सबसे ज्यादा सम्मान दिया, उसी व्यक्ति ने कांग्रेस नेतृत्व पर व्यक्तिगत हमला कर अपना असली चरित्र दर्शाया है। पहले संसद में मोदी के आंसू, पद्म विभूषण, फिर मकान का एक्सटेंशन…यह संयोग नहीं, सहयोग है।’

भाजपा की ‘आजाद’ पर प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सय्यद शाहनवाज़ हुसैन कहते है कि कांग्रेस के जिन नेताओं की सलाह पूर्व पीएम लिया करते थे, आज उनकी बात पार्टी में नहीं सुनी जा रही है। और इस कारण से कांग्रेस का ये हाल हुआ है। सय्यद कहते है – जिन व्यक्तियों के पास कांग्रेस है उन्हें ही वरिष्ठ नेताओं की कद्र नहीं तो कोई जमीर वाला नेता कैसे टिकेगा। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आगे जोड़ते है की गुलाम नबीजी का नाम जरूर ‘आजाद’ है लेकिन उन्हें असली आजादी आज मिली है।

  • पहले भी आजाद और राहुल गाँधी में अनबन हुई है
  • आजाद – राहुल ने पुरानी कांग्रेस को ख़त्म किया

इस्तीफे प्रकरण पर अन्य प्रतिक्रियाएँ

आजाद के पार्टी छोड़ने पर नेताओं की भिन्न-भिन्न प्रतिक्रिया है। जे एन्ड के के पूर्व सीएम फारुख अब्दुल्ला कहते है – अगर उन्होंने पार्टी को उस समय छोड़ा होता जब वह पटरी पर लौट चुकी होती तो ठीक था, लेकिन भंवर के समय छोड़ना ठीक बात नहीं।

आजाद के ‘मन की बात’

इस्तीफे पर कोई चर्चा छेड़ने से मना करते हुए आजाद कहते है, “मैंने इस फैसला पर बहुत सोच-विचार किया और इसको वापिस लेने का कोई सवाल नहीं है।” उन्होंने इस्तीफा देने के बाद टीवी चैनलों को बताया – मैं जल्दी ही जम्मू-कश्मीर जाऊंगा। मैं वहाँ जल्द ही अपनी पार्टी बनाऊंगा। मैं बीजेपी में शामिल नहीं होऊंगा।

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